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Wednesday, March 21, 2012

दरवाजे पे पलकें बिछाई थी मैंने !! ~♥ कल्प वर्मा ♥~


तुम कभी इस दिल में उतर कर देखो ,
हजारों अरमान साँस लेते मिलेंगे यहाँ , 
आँखों के समंदर में कभी डुबकियाँ लगा कर देखो ,
जाने कितने ख़्वाब तैरते मिलेंगे यहाँ !!

ये प्यार की दुनियां बड़ी हिफाज़त से सजाई थी मैंने ,
तन्हाइयों में हमेशा एक तेरी याद की ही महफ़िल सजाई थी मैंने ,
कोई ख़्वाब कभी जलाया नहीं , कोई अरमान कभी दफ़नाया नहीं ,
तेरे आने की ख़ुशी में साँसों की डोर टूट गयी ~♥ कल्प ♥~ की , 
फिर भी तू पास आके तो देख , कैसे दरवाजे पे पलकें बिछाई थी मैंने !! 
~♥ कल्प वर्मा ♥~


15 comments:

  1. सुंदर भावमयी रचना...

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  2. आपकी पोस्ट कल 22/3/2012 के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    http://charchamanch.blogspot.com
    चर्चा - 826:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

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  3. वाह बेहतरीन रचना ...समय मिले तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है।
    http://mhare-anubhav.blogspot.co.uk/

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    1. ji shukriya.....pallavi ji...maine aapke blog ko link kiya hua hai...apne blog pe...jab bhi time milta hai me jaroor read karta hu...bahut hi achcha likhte ho aap....

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  4. बहुत सुन्दर और सटीक अभिव्यक्ति प्रस्तुत की है आपने!

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    1. tahe dil se aapka shukriya...me aapke saamne abhi ek "jarra" saman hun....jab bhi samay milta hai aapki rachnaye jaroor padhta hun...mujhe jane anjane bahut kuch seekhne ko mil raha hai aapse...dhayawad....

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  5. सुन्दर रचना...
    हार्दिक बधाई.

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  6. सुंदर रचना ...बेहद खूबसूरत एहसास...

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  7. सुकोमल भावो से सजी बेहतरीन रचना....
    :-)

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