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Tuesday, January 17, 2012

~♥ कल्प ♥~ जिसकी " रूह " तो दिखती है मुझे



ज़िन्दगी ने मुझे क्या दिया , या ,
मैंने ज़िन्दगी को क्या दिया
इसी उधेड़बुन में बैठा हूँ मैं ,

मैंने कदम नहीं बढ़ाये , या ,
मज़िल कहीं दूर थी मेरी , पता नहीं ,

वक़्त ने साथ नहीं दिया , या ,
किस्मत कहीं नाराज़ थी मुझसे , पता नहीं ,

हर - सू में तेरा चेहरा नज़र आता था मुझे ,
हर ख्व़ाब तेरे पहलू से बाँध रखे थे मैंने ,
नींद नहीं आई मुझे , या
फिर शब् नहीं ढली कभी , पता नहीं ,

खुशियाँ खेलती , ज़िन्दगी नाचती थी कभी ,
हर लम्हें में हंसी गूंजती थी आँगन में ,
किसी कि नज़र लगी , या ,
खुदा को यही मंज़ूर था , पता नहीं ,

आईने में कभी-कभी खुद से पूछता हूँ मैं ,
कि कौन है ये शक्श ~♥ कल्प ♥~ जिसकी " रूह " तो दिखती है मुझे ,
लेकिन , जिस्म " सो " रहा है कहाँ , पता नहीं !!


10 comments:

  1. Nice one mere azeez.

    Jism so to raha hai magar har sheh ki khabar hai,
    rooh bezaar hai,jism khaali,armaa taar-taar,
    lete to hain hum kabra me,par dil ko teri dhadkan ki khabar hai,

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  2. bahut sundar panktiya hai...
    sundar rachana...

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  3. बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।

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